Monday, 18 March 2019

सोशल मीडिया के ड्रामा क्वीन और किंग्स

चलिये••• आज का सम्बोधन जरा अपने माननीय प्रधान सेवक जी के तरीके से करते हैं।
                  
                            Credit: Twitter

भाईयों और बहनों
एक बात बताईये की अगर आप अपनी सारी कमाई गयी सम्पत्ति एक सार्वजनिक स्थान पर रख के घर जाके सो जाते हैं, तो आप क्या उम्मीद करते हैं?


क्या आपको लगता है की आपकी सम्पत्ति सुरक्षित बचेगी?

क्या कोई सज्जन रात भर जाग कर उसकी हिफाज़त करेगा और सुबह होने पर लौटा देगा। और आपको समझाएगा की इस तरह की होशियरी नहीं करनी चाहिये?

या फिर कोई भी उसको हडप लेने का प्रयास नहीं करेगा?
या फिर दुनिया के बिन मांगे ज्ञान बांटने चुप होकर कोई टिप्पडी नहिं करेंगे?

अगर ऐसा लगता है तो आप इस दुनिया या इस युग के ब्यक्ति नहिं हैं। आप जरूर महाभारत या रामायण काल से पधारें हैं। और अगर ऐसा है भी तो इस तरह की मूर्खता का फल उस समय भी आपको अवश्य ही भुगतना होता।

ठीक उसी प्रकार आज के बुद्धि जीवी जिनका जीवन "सोशल मीडिया" के बिना अधूरा है, वे हरदिन इसप्रकार के कारनामें करते दिखायी देते हैं फिर समाज को कोसते हैं।

                   
                     Image credit: Pixabay

आप जो हर समय समाज और दुनिया को सवालों के कठ्घरे में खडा कर देतें हैं आज मैं भी आपसे कुछ प्रश्न पूंछता हूँ••• कि क्या आपको ही अधिकार है की दुनिया से उल्टा चलने का?

पहले तो आप अपने विचार सार्वजनिक पटल पे रखते हैं फिर ये सोंचते हैं की समाज का हर ब्यक्ति आपके विचारों से सहमत हो जाये। और सहमत ना हो तो चुपचाप बैठ जाये।
अरे भाई ये कैसे सम्भव है। आप भी तो अपने विचार किसी ना किसी के बिपरीत जाकर प्रकट कर रहे हैं।


अगर आप चाहते हैं की कोई आपके विचारों से असहमत ना हो तो आप अपने घर में प्रयास कीजियेगा। सबसे पहला विरोध आपके पिताजी ही से मिल जायेगा।


                   
                    Image credit : pixabay

अरे भाई लोग भारत के प्रधानमंत्री को नहीं छोड़ते तो आप किस खेत की मूली हैं।


ज्यादातर सोशल मीडिया के ड्रामेंबाज समाजिक नहीं होते। इसलिए उन्हे पता ही नहीं होता की "बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी "। या फिर वो मोहल्ले की चाची या मौसी की तरह होते हैं जिन्हें बस एक ही काम होता है कि जो बात निकले उसे दूर तक पहुंचाना।

बर्ना आपको ये भली-भाँति ये पता होना चाहिये की जैसे you want to be break free (जैसे आप सारे बंधनों को तोड देना चाहते है) वैसे ही कई सारे आपके भाई बन्धु जंजीरो को चुनौती देते रहते हैं। जैसे आप गाना गाते रहते हैं की "कोई ज़ोर जवानी पर नहीं " वैसे ही उनकी भी जवानी किसी बन्धन को स्वीकार नहीं  करती।

तो कुल मिला कर मेरा मुद्दा ये है की आप या तो विशेषज्ञों के परामर्श अनुसार सोशल मीडिया का प्रयोग सीख लें या फिर ये जान लें की आजकल आपने जो अपने मोबाइल या संग्डक (computer) से 1GB प्रतिदिन मुफ्त के डेटा के मध्यम से इंटरनेट के अनंत ब्राह्मांड में जो भेज दिया वो दुनिया के नाना प्रकार के आपके समान बुद्धिजीविओं के अवलोकन के लिये उप्लब्ध है, आप तो क्या दुनिया की कोई ताकत उन्हे नहीं रोक सकती। और निजता (privacy) की बात तो भूल ही जाईये।

और जहां तक किसी को रोकने की बात है तो भाई/बहन जब आपको कोई नहीं रोक पाया तो उन्हे कों रोकेगा?
आप चीपों चीपों करते रहिये।
मैने भी ज्ञान बांट दिया है मैं तैयार हूँ। अब अगर आपको मेरे विचार पसंद आये तो कृपया करके इन्हे आगे जरूर भेंजे।आपकी अती कृपा होगी।
और मेरे इस blog को subscribe करना ना भूलें।आपकी अति कृपा होगी।

धन्यवाद

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